विचार : भाषा बहता नीर


हम एक नये समय के बुद्धिजीवी हैं। हमारे बोलचाल और व्यवहार का संसार दिन ब दिन व्यापक होता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में हमारी भाषा में घुसपैठिये किस्म के शब्दों की भरमार हो रही है। हमारी भाषा में इनकी पैठ इतनी तगड़ी है कि इनके प्रयोग बिना हमारा काम चलना भी मुश्किल हो गया है। इसी मिश्रित भाषा में हम अपने विचार, उद्देश्य, अनुभव, सूचनाओं और मनोभावों को एक दूसरे तक पहुँचा रहे हैं। हमारे आपसी सारे संबंध इसी भाषा में बन रहे हैं। इस संदर्भ में उत्तर आधुनिक विद्वान यहाँ तक कह रहे हैं कि भाषा के बाहर कुछ भी नहीं। उनकी दृष्टि में ‘भाषा‘ का अर्थ बहुत व्यापक है और ये सच भी तो है। वैदिक काल से आज तक भाषा रूपी नदी का जल कितने घाटों से होता हुआ हम तक आया है। समय के साथ उसमें कितनी मिलावट होती रही है। जितने नये शब्द, उन शब्दों के साथ उतनी ही नई अभिव्यक्तियाँ जुड़ी हैं।

मानव सभ्यता और संस्कृति का इतिहास हमारे बोध में ऐसे अनेक शब्दों के जुड़ने अथवा उनकी विविध अर्थ छटाओं के अध्ययन का इतिहास है। मैं कई बार शब्दों के अनियंत्रित मेल से चकित हो जाती हूँ। पिछले कुछ दशकों के भीतर जाने कितने नये शब्द हमारी ज़ुबान पर चढ चुके हैं, वे हमारी बोलचाल की भाषा में अपनी पैठ बना चुके हैं। इन शब्दों में हमारे नये व्यवहारों के पते छिपे हुए हैं। ’विंडो’ का अर्थ अब सिर्फ खिड़की नहीं रहा। रसोई के चूल्हे के बारे में जब कोई यह कहता है कि यह ‘इको फ्रेंडली' है तो पच्चीस वर्ष पहले कोई इस शब्द के पीछे छिपे आशय को जानता तक नहीं था। ‘फास्ट फूड‘ शब्द कहाँ से तेज गति से दौड़ता हुआ आया और हमारी भूख में शामिल हो गया। किसी कमरे की दीवार के कोने में अपने बिल में बैठा चूहा परेशान है कि चूहा होने पर अब उसका एकाधिकार नहीं रहा। यहाँ बहुमंज़िला इमारतों के हर घर के टेबल पर एक कंप्यूटर है और उसके आगे उँगलियों को सुविधा दिलाने वाला एक 'माउस' विराजमान है। गणेश जी भी परेशान हैं कि इस नए युग मे कौन है जो उनकी उस शाश्वत सवारी के नाम की कॉपीराइट छीन रहा है।

दरअसल, शब्दों का सर्वाधिक जुगाड़ और अर्थों का हेर फेर नब्बे के दशक में आई संचार - क्रांति की वजह से हुआ है। एक समय था जब PCO, STD और साइबर कैफे जैसे शब्द खूब प्रचलित हो गए थे। समय आगे बढ़ा, ये चीजें देखते ही देखते एक दशक के भीतर पुरानी पड़ गईं और अब शायद ही नई पीढ़ी की ज़बान पर ये शब्द कभी आते हों!

मैं कई बार ऐसे शब्दों के आगमन के वर्ष, उनके अभिप्रेत अर्थों और उनके पीछे की संस्कृति के इतिहास में भटकती रहती हूँ। वहाँ अर्थों का एक जंगल है और मैं अपनी पगडंडी की तलाश करती हूँ। 21 वीं सदी आयी, विश्व ग्राम बनने के दावे भी हुए और साथ ही यह दुनिया कई टुकड़ों में भी बँटती गयी। पॉलिटिकल यथार्थ, बाज़ार, टेक्नॉलॉजी, उपभोक्ता संस्कृति, तेज समय, तेज गति, संवाद का साइबर युग, आभासी दुनिया, अभिव्यक्ति के नये धरातल, एक उम्मीद और गहरी अनिश्चितता के साथ और भी बहुत कुछ।

आइये हमारे व्यवहार में आये कुछ शब्दों, उनके जन्म के वर्षों और उनके सामान्य रुढ हो चुके अर्थों पर एक नज़र डालें।

ACID HOUSE (1988) - एक खास प्रकार का तेज और आक्रामक संगीत
BOOT  (1980) - किसी डिस्क या टाईप का प्रवेश करते हुए कम्युटर में कोई स्मृति जगाना
BIO DIVERSITY (1987) - पशुओं और वनस्पतियों की प्रजातियाँ
BLING (1997) - मणियों और जवाहरातों पर प्रकाश किरणों के प्रावर्तन का प्रभाव
BLOG (1999) - लेखक का कम्प्युटरीकृत वैयक्तिक रोजनामचा
CHILL (1985) - फुरसतिया लोगों का आपस में टाइमपास
COOL (1933) - बेहद आकर्षक, गज़ब
CD ROAM (1983) - कोम्पेक्ट डिस्क जिसमें केवल पढने के लिये कोई सामग्री
CYBER PLACE (1982) - विशेष पर्यावरण जिसमें इलेक्ट्रोनिक संवाद घटित होता है
DOCUSOAP (1991) - टीवी पर बिना पटकथा वाले मनोरंजन दृश्य जिनमें लोगों का दैनिक जीवन दर्शाया जाता है
DVD (1993) - डिजिटल विडियो डिस्क
FAQ (1991) - फ्रेक्वेंटली आस्क्ड क़्चेश्च्न्स (अक्सर पू्छे जाने वाले प्रश्न)
HTML (1992) - ‘हाइपर टेक्स्ट मार्क अप लेंग्वेज़’ (विश्व व्यापी को निर्मित करने की प्रणाली)
LADDISH (1991) - पुरुष दंभ से भरी मनोवृति
NAME & SHAME (1990) - किसी व्यक्ति या संस्था की गलत हरकतों को सार्वजनिक करना
PUKKA (1991) - जेनुइन और उत्कृष्ट
SPAM (1994) - इन्टनेट पर निर्रथक सामग्री का प्रसारण 
SURF (1993) - एक साइट से दूसरी साइट में विचरण करते रहना
WAP (1997) (वायरलेस एप्लीकेश्न प्रोटोकोल) - मोबाइल फोन से सामग्री प्रेषित करने की विधि
WEB CAST (1995) - इन्टरनेट पर जिवंत प्रसारण
WI FI (1999) - छोटे रेंज के भीतर तीव्र गति वाला बेतार संचरण

(यह सूची अनन्तिम है आप इसमें कई शब्द जोड़ सकते हैं)

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