विचार : महानगरों में बचपन


और बालसाहित्य इतिहास हो गया

ये उन दिनों की बात थी जब भारतीय बालमन Generation 'X' (1960-1980) बालसाहित्य में रमता था। उन दिनों 'पराग' (TOI), 'नंदन' (HT), 'मनमोहन' (मित्र प्रकाशन), 'राजा भैया' (आत्माराम एन्ड सन्स) 'चंदामामा' और 'लोटपोट' जैसी बालपत्रिकाएँ बालकों के बीच कुतूहल का विषय हुआ करती थीं।

टेलीविजन क्रांति के साथ आये 'टॉम एंड जेरी' शो ने generation 'Y' (1980 - 2000) के हाथों से बची - कुची कॉमिक्स (किताब) भी छीन ली। इलेक्ट्रॉनिक पर्दे पर उछल कूद मचाने वाले 'स्पाइडरमैन', 'सुपरमैन' और 'रोबोर्ट' जैसे चमत्कारी देव इस पीढ़ी के बच्चों के दिलों पर राज करने लगे। जादुई पिटारे की इसी धूम धड़ाके के बीच generation 'Z' (2000 - अबतक) की पीढ़ी ने आँखें खोली। इस समय तक केबल नेटवर्क के जरिये भारत में परोसे जाने वाले चैनलों ने पुराने बाल साहित्य को कॉर्टून सिरियल्स (मोगली) में तब्दील कर दिया। जिसके चलते छोटे-छोटे बच्चे टीवी चलाये जाने के साथ ही ब्रश करने और दूध पीने का हट करना सीख गए। कार्टून के प्रति बच्चों की बढ़ती रूचि को देख बालगणेश, बालहनुमान और बालकृष्ण, छोटा भीम (कार्टून सिरीज़) के नवीन प्रयोगों के जरिये बच्चों में भारतीय संस्कार डालने के तरीके ईजाद किये गए।

बीसवीं सदी के आखरी दशक में सूचना प्रौद्योगिकी के विस्फोट ने कार्टून नेटवर्क के जरिये बचपन की रुचियाँ ही बदल डाली। कविता की दुनिया में विश्वकविता की चर्चा के साथ बच्चों की दुनिया में विश्व प्रसिद्ध साहित्य अपनी जड़ें जमाने लगा। बच्चे दूर देश इंग्लैण्ड के प्रसिद्ध 'हेरि पॉटर' की जादुई श्रृंखलाओं में डूबने लगे।

कार्टून्स में इधर कुछ सालों से 'सिनचैन' अपनी उलटी सीढ़ी हरकतों से बच्चों में उल्टी - पल्टी जिद की आदतें लगाने लगा है। तकनीक में सबसे आगे पहुँचे देश 'जापान' का 'डोरेमोन' अपने जादुई पॉकेट में गैजेट्स की दुनिया को साथ लेकर प्रकट हुआ। (डोरेमोन के गैजेट्स नोबितो के होमवर्क को चुटकियों में निपटा देते हैं। ठीक जैसे आज के बच्चे गूगल की सहायता से अपने स्कूल के प्रोजेक्ट्स बना लेते हैं।)

पिछले कुछ सालों से स्मार्ट फोन (गैजेट्स की दुनिया का सबसे ओजस्वी - तेजस्वी यंत्र) ने दुनिया को मुट्ठी में करने की रही सही कसर भी पूरी कर दी।

आगे आप जानते ही हैं कि जिस दिन आँख खोलते बच्चों ने स्मार्टफोन को अपने खिलौने के रूप में पाया उसी दिन से हमारा आपका प्यारा 'बालसाहित्य' इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।

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